Wednesday, April 21, 2010

पृथ्वी को हमारी देन


वाकई अगर हम अपने इतिहास पर गौर करे तो पाते है कि हमने अर्थात हमारे पूर्वजों ने इस धरा को काफी कुछ दिया है। ये ग्लोबल वार्मिंग जैसी महत्वपूर्ण चीज हमने ही तो दिया है, जिसके कारण आज पृथ्वी नष्ट होने के कगार पर पहुँच गयी है । और अगर सबकुछ ठीकठाक चलता रहा तो हम अगली कुछ सदियों में इस धरा से जीवन समाप्त करने में सफ़ल हो ही जायेंगे। अपने तथाकथित विकास के लिए हमने प्रकृति के साथ इतना ज्यादा छेड़छाड़ किया है कि अगर अभी भी हम सचेत नहीं होते हैं तो इसका बर्बाद होना निश्चित है।
संपूर्ण विश्व आज हथियारों कि दौर में शामिल है। एक ओर अमेरिका ऐसे ऐसे मिसाईल बिकसित करने में लगा है जिससे कि वह घर बैठे ही पूरे विश्व को समाप्त कर सके तो दूसरी ओर ईरान अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के जरिये परमाणु बम बनाने का सपना देख रहा है। आएदिन ग्लोबल वार्मिंग को लेकर जो कुछेक सम्मलेन हो रहे है वो भी असफल हो रहे हैं। इस बात से ही यह पता चलता है कि अपनी पृथ्वी को बचाने के लिए हम कितने जागरूक हैं?????????????????????????????

No comments:

Post a Comment

का.हि.वि.वि. की जिंदगी

आजकल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में परीक्षाओं का दौर चल रहा है। बेचारे बच्चे प्रश्नपत्र पाने के लिए जुगार लगा रहे है। वे और कर भी क्या सकते...